शिल्पवेद पुनरुद्धारक शिल्पकलानिधि श्री॰ कृष्णाजी विनायक वझे

भारतवर्ष अपनी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। अतीत में यह न केवल अधात्म में अग्रणी अपितु भौतिक उन्नति के पराकाष्ठा पर भी विराजमान थी। इस संवृद्धि के आधार थे प्राचीन भारतीय टेक्नोलॉजी जो ‘शिल्प’ के नाम से प्रसिद्ध है। परन्तु काल के प्रवाह में यह नष्ट होती चली। लगभग ३००० वर्षों के …

भारतीय प्रौद्योगिकी शास्त्र ‘शिल्प’: एक परिचय

भारतीय शास्त्रीय ज्ञान सम्पदा का मूलाधार ‘वेद’ है, जो चार संहिता तथा अनेक शाखाओं के रूप में आज भी प्रवाहित हो रहा है। आर्ष परम्परा के अनुसार वेद समस्त सत्यविद्याओं का मूल स्रोत है। इसमें परा (आध्यात्मिक) एवं अपरा (भौतिक) विद्याएँ मूलभूत सिद्धान्त (बीज) के रूप में विद्यमान हैं। मानव कल्याण हेतु ऋषियों ने इन …